​समाचार

यूनियन के बारे में अखबार और 

प्रवासी मजदूर यहां नहीं किसी का वोटबैंक, इसलिए सामान की तरह रख दिया कार पार्किंग में

राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के पदाधिकारी मुकेश ने बताया कि उन्होंने दर्जन भर से ज्यादा कैंपों का दौरा किया तो पाया कि यहां बहुत ही खराब हालत है। कैंपों के हालात जेल से भी बदतर है। वहां मजदूरों को किसी तरह की सुविधा देना तो दूर पीने के लिये साफ पानी तक नहीं है। उन्होंने बताया कि उसी टैंकर के पानी को पीना पड़ रहा है और इसी टैंकर के पानी से शौच के हाथ आदि साफ करते हैं। गर्मी होने के बाद भी रात में यहां पंखे नहीं चलाए जा रहे हैं। इस वजह से मजदूरों को रात भर जागना पड़ रहा है।

Lockdown: Ajmer Dargah Management Seeks Centre, State Govt's Help to Transport Stranded Devotees to Their Homes

In a joint letter, Peoples’ Union for Civil Liberties(PUCL), Jamaat-e-Islami Hind(Rajasthan unit), NAPM(Rajasthan), Centre for Equity Studies, Pink City Haj and Education Welfare Society, Helping Hands, Bharat Gyan Vigyan Samiti, Soochna ka Adhikar Samiti, Mazdoor Kisan Shakti Sangathan, Rajasthan Asangathit Mazdoor Union and Nirman Evam General Mazdoor Union have urged the Rajasthan government to take up the issue of Ajmer Dargah devotees with the Central government and ensure their shifting to their native places.



They said that if the Central government could arrange shifting of UP students from Kota to their native places, the union government should also make arrangement to rescue the stranded devotees of Ajmer and drop them at their residences safely.

Lockdown: जयपुर में सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों को पहुंचाई राहत, 5000 राशन किट बांटे

संगठनों ने कहा कि दिहाड़ी मजदूरों को दिए गया सूखा राशन अपर्याप्त है. उसकी मात्रा बढ़ाई जाए और उन्हें कम से कम 10 दिन की राशन सामग्री उपलब्ध कराई जायी. सरकार ने जो राशन किट उपलब्ध करवाए हैं. वैसा किट प्रत्येक मजदूर को दिया जाना चाहिए ताकि उसे 10 दिन राशन एक मुश्त प्राप्त हो सके.

Defying order, Rajasthan gov’t allegedly distributes dry ration kit to family instead of all individuals

After writing to the government of Rajasthan and police authorities there about the communal treatment being given to hawkers in the wake of the coronavirus outbreak that has now been made more of a religion issue than a medical issue, the joint memorandum of organizations comprising PUCL Rajasthan, Center for Equity Studies (Rajasthan), Nirman and General Labour Union, Majdoor Kisan Shakti Sangathan, Rajasthan Asangathit Mazdoor Union, Bharat Gyan Vigyan Samiti, Helping Hands Jaipur, Rajasthan RTI Manch and Jamait-e-Islami Hind have written to the Principal Secretary for Food and Consumer Supplies about the wrong interpretation and implementation of the government order regarding dry rations which was issued on March 23, 2020.

कोरोना वायरसः क्या है राजस्थान का कंटेनमेंट प्लान

मजदूरों के लिए काम करने वाले राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन के मुकेश गोस्वामी बताते हैं, "हम 11 संस्थाएं मिलकर लोगों को खाना वितरण कर रहे हैं. बाहर से आने वाले मजदूर और शहरों से दूर कच्ची बस्तियों में रहने वाले बंगाल, बिहार, उड़ीसा के लोगों तक सरकारी दावे नहीं पहुंच रहे हैं."

वह कहते हैं, "लोगों को हम 21 मार्च से खाना वितरण कर रहे हैं, लोग परेशान हैं. सरकारी मशीनरी शहरों तक तो एक जगह खाना उपलब्ध करा रही है लेकिन हर किसी भूखे तक उनकी पहुंच नहीं है."

सेठ नहीं दे रहे पैसा, ठेकेदार भी हो गए गायब

इलाके म कई सामािजक संगठनों ने मजदूरों को खाने की वथा का िजा संभाला है।
मजदूरों को खाना बांटने का काम कर रहे राजथान असंगिठत मजदूर यूिनयन के सहायक
सिचव मुकेश गोामी ने बताया िक िति दन इस े मभोजन के करीब 1500 पैकेट बांटे जा
रहे ह। लेिकन यह भी कम ह। सरकार को इन मजदूरों के िलए थायी इंतजाम करने चािहएं।

मनरेगा के 14 साल पूरे होने पर राजस्थान में मज़दूरों का कम बजट को लेकर केंद्र सरकार के ख़िलाफ प्रदर्शन

इस अवसर पर राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन राज्य सचिव बालुलाल ने कहा कि, “केंद्र की मोदी सरकार रोज़गार जैसे अन्य कई बुनियादी मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए सीएए जैसे जुमले लेकर आई है, जिससे लोग इसी में उलझकर रह जाएँ और अपने जायज़ हक की मांग न करें.”

भीम : प्रधानमंत्री के नाम पर राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन ने सौंपा ज्ञापन

भीम कस्बे में सोमवार को राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर ज्ञापन

मजदूरों की अनूठी जनसुनवाई

यहां मजदूर किसान शक्ति संगठन, हाल ही असंगठित क्षेत्र के विभिन्न ट्रेड के लिए बने राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन और सूचना वाम रोजगार अधिकार अभियान राजस्थान के बारे में जानना उचित होगा। ये तीनों ही संगठन इस अनूठी जनसुनवाई और सामाजिक अंकेक्षण (सोशल आडिट) की प्रक्रिया से जुड़े थे।

यूनियन की कहानी बाद की है, पर पहले इसी यूनियन के बारे में जानते हैं। मजदूर किसान शक्ति संगठन पहले से था, जिसकी पहल पर ही यूनियन बना। राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन का गठन करने का निर्णय 26 अक्टूबर 2017 को अजमेर जिले के जवाजा में लिया गया। अगले वर्ष जून 2018 को इसका पंजीयन हुआ। इसकी सोच शुरूआत में नरेगा (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा) को बाद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम दिया गया) मजदूरों के हक के लिए थी, पर बाद में सभी असंगठित मजदूर इसके दायरे में शामिल कर लिए गए।

यूनियन की राज्य इकाई के साथ प्रखंड इकाई भी होती है। पंचायत स्तर पर यूनियन के कार्यकर्ता होते हैं। इसमें 27 पंचायत स्तर के कार्यकर्ता हैं जिनमें 26 महिलाएं हैं, केवल एक पुरूष है। यूनियन में लगभग 4000 सदस्य हैं जिनमें अधिकांश महिलाएं हैं। यूनियन का कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान के 4 जिलों में हैं जिनमें पाली, अजमेर, राजसमंद और भीलवाड़ा शामिल हैं। यूनियन का प्रधान कार्यालय देवडूंगरी (राजसमंद जिला) में है, जो मजदूर किसान शक्ति संगठन का भी कार्यालय है।

देश में 93 प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र से हैं। जैसे ईँट भट्टे, कुआं खुदाई, होटल, छोटे कारखाने, नरेगा, खेतिहर मजदूर, रेहड़ी पटरी, हाथ ठेले पर सब्जी व फल बेचने का काम करते हैं। इन सभी के लिए यूनियन लड़ती है। यूनियन ने नरेगा के लिए निर्धारित 100 दिन का पूरा काम लिया है। उसकी पूरी मजदूरी भी ली है। अगर हम देश के अन्य राज्यों को देखें तो यह बड़ी उपलब्धि है।

India – Universalise Ration-Pension and include all workers

Members from MKSS, RAMU and MKKVPL took out a rally in Bhim ending with a public demonstration demanding the government take concrete action on the issues brought up by the thirteen points in the strike charter. A public statement was made by the MKSS focusing especially on the impact the current regime’s policies have had on the rural economy. In solidarity with the strike, the MKKVPL stores remained shut all day.

Unorganised workers demand recognition of labour rights

Addressing the labourers who had arrived from Bhilwara, Rajsamand, Ajmer, Pali and other districts, social activist and Magsaysay Award winner Aruna Roy said the labourers and common people should come together to strengthen the rights which they had gained after prolonged struggles. There should be no scope for denial of minimum wages and minimum days of employment to workers, she said.


Nikhil Dey of the Mazdoor Kisan Shakti Sangathan said the NREGA, adopted after a long-running campaign in Rajasthan, was not just a legislation, but had the potential to bring about “revolutionary changes” if implemented in its true spirit. No compromise could be made on getting minimum wages for work, he added.

राजस्थान के असंगठित क्षेत्र के मजदूर एक होंगे तभी उनको मिलेंगे उनके सारे हक- अरुणा रॉय ।।

ग्रामीण मज़दूरों के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने वाली व महात्मा गांधी नरेगा, सूचना का अधिकार व अन्य कई सामाजिक सुरक्षा के लिए आंदोलन करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने कहा कि ये देश मज़दूरों और किसानों से ही चलता है। इस इलाके के मज़दूरों और किसानों ने देश को बहुत बड़े कानून दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी मज़दूर एक होंगे तो उनके सारे हक मिलेंगे। उन्होंने कहा कि अभी ये संख्या चार हजार है लेकिन एक दिन यह संख्या राजस्थान में 40 लाख होगी मुझे ऐसा पूरा भरोसा है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं महात्मा गांधी नरेगा कानून के आंदोलन से लेकर एक-एक लाइन लिखने का काम करने वाले निखिल डे ने कहा कि मज़दूर किसान बहिन-भाई लेकर रहेंगे पाई पाई। उन्होंने आगे कहा कि नरेगा केवल कानून नही यह क्रांतिकारी बदलाव है।

©2020 by Rajasthan Asangathit Mazdoor Union. Proudly created with Wix.com